Monday, 15 August 2016

Panic Disorder in Hindi

PANIC DISORDER (पैनिक डिसऑर्डर)
पैनिक डिसऑर्डर (Panic Disorder) सामान्यतः अचानक होने वाली घबराहट (Panic Attacks) का सिलसिला होता है जो एक साल में कभी कभार से लेकर दिन में कई बार तक हो सकती है। यह रोग अधिकांशतः Agoraphobia (नीचे पढ़ें) के साथ पाया जाता है।
       जो व्यक्ति panic attacks को महसूस करते हैं वह ज्यादातर शुरुआत में मेडिकल इमरजेंसी या फिजिशियन के संपर्क में आते हैं क्योंकि इस रोग से उत्पन्न हुई घबराहट इतनी तीव्र होती है की व्यक्ति को हार्ट अटैक होने जैसा अहसास होता है। विश्व में इस रोग के होने की व्यापकता (prevalence) 1.5 % से लेकर 5.0 % तक होती है जबकि कभी कभार होने वाले panic attacks की व्यापकता 3 से 5.6 % तक हो सकती है। यह रोग स्त्रियों में पुरुषों की तुलना में तीन गुना अधिक देखा गया है।
Panic Attack के लक्षण:
       जब तीव्र घबराहट का वाक्या होता है जोकि कुछ मिनट से लेकर 40 मिनट तक का हो सकता है उसे हम panic attack कहते हैं। जब यही अटैक जल्दी-जल्दी और बार-बार होता है तो यह डिसऑर्डर का रूप ले लेता है।
       panic attack निम्न दिए गए लक्षणों में से कोई चार लक्षण दस मिनट के भीतर उग्र रूप धारण कर लेते है:
·       दिल का जोर से धड़कना या दिल उछलता हुआ महसूस होना
·       तेज़ी से पसीना आना
·       हाथ पैरों में कंपन
·       सांस खींचने में कठिनाई महसूस होना
·       गला चोक (choke) होने जैसा अहसास होना
·       सीने में दर्द या असहजता
·       उबकाई या पेट में हलचल/असहजता
·       चक्कर महसूस होना
·       खुद पर कण्ट्रोल खो देने या पागल जैसा हो जाने का दर लगना
·       मृत्यु होने का भय लगना
·       हाथों पैरों में झनझनाहट/सुन्नपन महसूस होना
·       चेहरा लाल पड़ जाना
जब इस तरह के अटैक एक महीने से ज्यादा समय से और महीने में चार बार से ज्यादा पड़ रहे हो तब इसे panic disorder कहते हैं।
     प्रथम panic attack अचानक से उत्पन्न होता है और मुख्यतः हार्ट अटैक हो जाने की सोच जुड़ जाती है। रोगी व्याकुल हो जाता है और ध्यान केन्द्रित करने में दिक्कत महसूस करते हैं। वे अटैक होने वाले परिवेश से बाहर निकल जाना चाहते हैं और मदद की अपेक्षा करते हैं। यह अटैक ज्यादातर २० या ३० मिनट के होते हैं दो अटैक के बीच के अन्तराल में भविष्य में हो सकने वाले अटैक की चिंता बनी रह सकती है। हार्ट अटैक या दम घुटने जैसी सोच तीव्र होती जाती है जिसके फलस्वरूप रोगी फिजिशियन के संपर्क में आने पर कई जांचों से गुज़रता है जैसे ECG, ECHO जिनमें कोई बड़ी आसामान्य गड़बड़ नज़र नहीं आती है। मतलब जांचें नॉर्मल आती हैं।
     Agoraphobia
बार बार अटैक पड़ने से अगोराफोबिया की स्तिथि बन सकती है जिसमें रोगी ऐसी जगहों से जाने घबराता है जहाँ से निकल पाना आसान ना हो या जहाँ मदद मिलने की संभावना ना हो जैसे बस, ट्रेन, लिफ्ट, पिक्चर हाल, या भीड़ भाड़ वाला बाज़ार ऐसी जगहों पर जाने से रोगी कतराता है, नहीं जाता है या वहां किसी को साथ ले जाने की गुजारिश करता है। कभी कभी अगोराफोबिया की सोच इस कद्र मन में बैठ जाती है कि रोगी घर से पूर्णतया निकलना बंद कर देता है और घर बंद होकर रह जाता है।   
Panic Disorder होने के कारण:
सामान्यतः हमारे आसपास होने वाले कारणों से घबराहट उत्पन्न होती है जिसके लक्षण पैनिक अटैक जैसे ही होते हैं उदाहरण के तौर पर तीव्र गतिमान गाड़ी से टकरा जाने का डर, उग्र जानवर से काटे जाने का डर, इत्यादि। ऐसी परिस्थिति में बाहरी कारकों के होने की वजह से दिमाग में घबराहट के केंद्र सक्रिय हो जाते हैं और इन कारकों से बचने या लड़ने का संकेत देते हैं। इस तरह से यह घबराहट लाभदायक होती है लेकिन पैनिक डिसऑर्डर में ये केंद्र बिना किसी बाहरी कारकों के होने से सक्रिय हो जाते हैं और रोग का कारण बने रहते हैं। मुख्यतः serotonin norepinephrine और GABA रसायनों की असामान्य क्रिया दिमाग की limbic system, prefrontal cortex और locus ceruleus जैसे केन्द्रों में होने से जोड़ कर इस रोग को देखा गया है।

इलाज/treatment
इलाज के प्रकारों में relaxation exercise, respiratory training, CBT, counseling और साथ में दवाइयों का असरदार परिणाम देखा गया है। जिसके फलस्वरूप रोगी सामान्य जीवनयापन कर पाटा है इलाज की प्रक्रिया थोड़े लम्बे समय तक चलने वाली होती है।